मैंने तो नज़र भर देखा था
खिड़की खोल के रौशनी को
उड़ चल, तूने कहा
तेरे जहान अभी और भी हैं
तेरे हौसले से चलने लगी
ना ठहर, तूने कहा
तेरे मक़ाम अभी और भी है
ऊँची है उड़ान तेरी
फैला पँख, तूने कहा
तेरे आसमां अभी और भी है।।


अजीत सतनाम कौर
फ़रवरी 2014

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