यूँ कहने को तो नहीं जुस्तजू रही कोई
बैठी हूँ बीच दरिया प्यास अभी है बाकी

समेट तो लिए है मैंने लफ़्ज़ सारे
दिल में कहीं ज़ज़्बात अभी है बाक़ी

प्रेम की बारिश में भीगते हैं आशिक़
मेरे हिस्से की वो बरसात अभी है बाकी

रफ़्तार से हर रोज़ दौड़ रही है ज़िन्दगी
जो छूट गया उसका अहसास अभी है बाकी

उँगली पकड़ रेत पे लिखा था नाम
मिटाया लहरों ने पर छाप अभी है बाकी

आग़ोश तेरी में ना हो कभी सुबह मेरी
मेरे हिस्से की वो रात अभी है बाकी

चला तो गया तू अलविदा कह कर
यकीं है मुझे आख़िरी मुलाक़ात अभी है बाकी

लोग कहते है मिल गई मंज़िल मुझको
जानता है मेरा दिल तलाश अभी है बाकी
'अस्क' की तलाश अभी है बाकी।।



अजीत सतनाम कौर
2015

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