उम्का कैसा ये सैलाब आया
सोए जज्बातों का कैसा बहाव आया

यूँ तो ख़तरे के निशान को निगल गया उम्र का पानी
जिंदगी की दौड़ में,ना मुझे ये ख्याल आया।।



कुछ नगद तो, कुछ कर्ज़ में थी जिंदगी
अनचाहे से फ़र्ज़ में थी जिंदगी
हर पल जीओ यारों
यही बात तुम्हें बताना चाहता हूँ 
चलाओ जादू की छड़ी
मैं गुजरे दौर में
लौट जाना चाहता हूँ।।
उम्र 


खामोश रास्तों में भी हलचल मचाए रखना
जूड़े में महबूब के फूल सजाए रखना

गले से लिपटे रहेंगें रिश्ते सारे
दोस्तो से पर हाथ मिलाये रखना




तोड़ो भी अब चुप्पी, क्यूँ अभी तक कुछ जताया नहीं
घण्टी बजी तो हम भी चल देगें
फिर ना कहना कि बताया नहीं।।


Comments

Popular Posts