क्या कहूँ दिल में ऐसे समा गया कोई
दिल की दुनियां को मेरे बसा गया कोई

बेख़र था दिल मेरा जाने कैसे
उसकी दुनिया में चुपके से आ गया कोई

ये सोचा भी था ना ख़ाब में
बेख़ुदी में जलवा दिखा गया कोई

सुना रही थी मैं तो गमों के नग़मे
गीत खुशियों के सुना गया कोई

जो कुछ भी लिखा था दिल की तख़्ती पे
आँसुओ से अपने मिटा गया कोई।।



अजीत सतनाम कौर
अक्टूबर 2015

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