गिर के सज़दे में तेरे ख़ुदा मांगा है
अंदाज़े सुख़न अपना जुदा मांगा है

करूँ मुहब्बत मैं तेरे नेक बन्दों से
फ़क़त एक यही शौंक सदा मांगा है

ना मोहताज़ 'अस्क' कभी दुनिया में हो
उठा हाथ तो दुआ यही मांगा है।।


अजीत सतनाम कौर
अगस्त 2015

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