ना मैं कुछ कह सकती हूँ
ना ही वो मुझे बताता है
दूँ नाम क्या इसको
दूँ नाम क्या इसको
जो मेरा उसका नाता है
गर है वो चाँद तो हूँ मैं चाँदनी
उसका है दिल ये बताता है
डरता है ना गुज़र जाऊ
सोते कहीं
हर सुबह वो बंसरी बजाता है
सोते कहीं
हर सुबह वो बंसरी बजाता है
हार गई थी मैं बेदर्द ज़माने से
बाज़ी हार के अपनी
बाज़ी हार के अपनी
मुझे जीतता है
मिटाने को अँधेरे मेरे जीवन के
अपनी आँखों के दीये वो जलाता है
अपनी आँखों के दीये वो जलाता है
अश्कों से ख़ाली हो गईं मेरी आँखें
'अस्क' के हिस्से के आँसू बैठ वो बहाता है।।
'अस्क' के हिस्से के आँसू बैठ वो बहाता है।।
अजीत सतनाम कौर
2015
2015
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