दर्दों ग़म का हिसाब लिखना है
जिंदगी तुझपे किताब लिखना है
जिंदगी तुझपे किताब लिखना है
उम्र भर जो ना हो सके पूरे
कुछ अधूरे से ख़्वाब लिखना है
कुछ अधूरे से ख़्वाब लिखना है
बात जो कह ना पाए थे तुमसे
बात वो भी जवाब लिखना है
बात वो भी जवाब लिखना है
कोई मुझको पढे, पढे ना पढे
अब मुझे बेहिसाब लिखना है
अब मुझे बेहिसाब लिखना है
हाय रे कैसी है ये मज़बूरी
'अस्क' खार को भी गुलाब लिखना है।।
'अस्क' खार को भी गुलाब लिखना है।।
अजीत सतनाम कौर
जनवरी 2018
जनवरी 2018
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