क्या कहूँ दिल में मेरे ऐसे समा गया कोई
दिल की दुनिया को मेरे ऐसे बसा गया कोई
दिल की दुनिया को मेरे ऐसे बसा गया कोई
बेख़बर था दिल मेरा ना जाने कैसे
उसकी दुनिया में चुपके से आ गया कोई
उसकी दुनिया में चुपके से आ गया कोई
ये तो सोचा भी ना था मैंने कभी
बेख़ुदी में जलवा दिखा गया कोई
बेख़ुदी में जलवा दिखा गया कोई
सुना रही थी मैं ग़म के नग़मे
गीत ख़ुशी के सुना गया कोई
गीत ख़ुशी के सुना गया कोई
दिल की तख़्ती पे लिखे थे गीत जितने
आँसुओ से अपने मिटा गया कोई
आँसुओ से अपने मिटा गया कोई
दिल ने कहा 'अस्क' अब बाज़ आ ओ
रोती हुई को हँसा गया कोई।।
रोती हुई को हँसा गया कोई।।
अजीत सतनाम कौर
2015
2015
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