जब भी लम्हें याद आये है
शबे तन्हाई में आँसू बहाए है
गुज़रे थे जो दिन साथ तेरे
तेरी यादों से सजाए है
गमें जुदाई ने स्याह किया दिल को
तेरी याद में दीये जलाए है
तेरे वादे तेरी बातें तेरी याद
सब सीने में छुपाए है
जब भी चाहा तेरा जिक्र करना
बहाने से 'अस्क' ने गीत गाए है।।
अजीत सतनाम कौर
नवम्बर 2015

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