किस शरारत से बोल रहे हो
अब क्या बताऊँ हाय तौबा
नब्ज़ छू कर जान लेते हो
तुझसे क्या छुपाऊँ हाय तौबा
हर बार सुना वही गीत मुझसे
फिर वही सुनाऊँ हाय तौबा
मूँदी आँखे तेरी क्या अदा है
जागे को जगाऊँ हाय तौबा
साये से समाये हो मुझमें
दूरी कैसे बनाऊँ हाय तौबा
तेरे हाल सा ही मेरा हाल है
हाले दिल क्या बताऊँ हाय तौबा।।


अजीत सतनाम कौर
फ़रवरी 2016

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