क्यूँ लोग हमेशा अपने पहले प्यार की बात करते है,
बात मैं बताना चाहूंगी अपने आख़िरी प्यार की,
जो अभी तक छुपा रहा, बात उस यार की,
पहला प्यार तो सिर्फ एक एट्रेक्शन था
उम्र के साथ मिट गया,जैसे बॉ
आख़िरी इश्क़
डी में हुआ रिऐक्शन था।
टीन ऐज में सड़कों पे फ़िल्मी हीरो ढूंढने लगी,
कुछ हकीकत हाथों से छूटने लगी।

सब हीरोइन मुझे अपने आप मे दीखने लगी।
शीशी के आगे नाच के, मैं अदाएं सीखने लगी।
कियोंकि मैं कपडों में मॉडर्न
चरित्र में सवित्री होना चाहती थी,
प्यार तो चाहती थी पर ना कुछ खोना चाहती थी।
इसीलिए ये आज़माइश चलती रही,
और मेरे प्यार की उम्र निकलती रही।
किसी का गुलाब याद है तो किसी की किताब याद है।
अगर कोई गर अच्छा लगा  प्यार में ना वो सच्चा लगा।
साथी के रूप में पतिदेव आ गया,
करके पोछा बर्तन मैं सबकी जान बन गई।
किसी की बहू, किसी की बीबी, किसी की माँ बन गई।
आज भी आँखों में बाकी एक आशा है,
दिल के किसी कोने में नन्हीं सी अभिलाषा है,
आंखों पे मोटा चश्मा, बालों में चांदी है, हाथ में लाठी है, और कमर की टूटी काठी है
तो क्या हुआ
अब और ना मैं देर करूँगी
जल्द ही आखिरी प्यार को तुमसे शेयर करूँगी।


नवंबर 2019

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